विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस
स्वरचित कहानी -:
भोली सी, प्यारी सी, एक गुड़िया। नाम- रीना, मीरा, हेमा, नेहा। आप में से कोई भी। 12 - 13 वर्ष की । आपकी ही तरह। सभी की प्यारी। हमेशा मुस्कान लिए उछलते-कूदते, सभी के दु:खों को दूर करने वाली। आपकी ही तरह। प्यारी सी। प्रतिदिन विद्यालय जाती। खूब मन से पढ़ती। खूब खेलती। खूब गाती। सभी की दुलारी।
आज अचानक स्कूल बंद हो गया। खेलना रुक गया। खेलती- कूदती मुस्कुराती जिंदगी, अचानक थम-सी गई। गांव के बड़े बुजुर्ग, अम्मा, दादा, नाना - नानी, सब डरे सहमे से हो गए ना कोई काम पर जाता, ना कोई किसी से मिलता, ना कोई किसी से प्रेम से बातें करता। नन्हीं बच्ची तो मानो जेल में बंद हो गई हो। अम्मा, दादा, नाना - नानी के मुंह से बस एक बात सुनती - कोरोना। ना मिलना ना बात करना। ना कहीं जाना।
घर गरीब था। तो रुपयों की तंगी होने लगी। खाने-पीने में कमी। मेरी चॉकलेट, मेरी मिठाई, सब बन्द। मेरे दोस्तों से मेरा मिलना तो मानो सदियां बीत गई। अचानक टीवी में एक दिन उसने देखा लोग भूख से पीड़ित हैं, खाने को नहीं है। लोग किसी से मिलना नहीं चाहते। मानवता समाप्त हो रही है। छोटी बच्ची के आंख में आंसू भर आए।
छोटी बच्ची खूब जानती थी वह बहुत हिम्मती थी। ठीक आपकी तरह। उसे पता था कि कोरोना ऐसे जाने वाला नहीं है। ऐसे में तो खानपान, घूमना, लिखना सब बंद ही हो जाएगा। तो उसने ठाना कि वह सभी लोगों को बताएगी। समझाएगी। और उन्हें जागरूक करके ही दम लेगी।
तो बच्चों आप जैसी उस नन्हीं सी बच्ची ने क्या किया होगा ? कैसे अपने अम्मा, दादा, नाना - नानी को जागरूक किया होगा ? कैसे अपने दोस्तों से मिलना जारी रखा होगा? कैसे अपनी पढ़ाई जारी रखी होगी ? कैसे उसने अपना जीवन पहले सा बनाया होगा? कैसे उसने रुपए पैसों की तंगी को दूर करने के उपाय बताए होंगे ?
एकदम सही बच्चों... आप जैसा सोच रहे हैं उसने वैसा ही किया। दादा-दादी, नाना - नानी, अम्मा को समझाया। बताया कि हमारे साफ हाथों से, लोगों से दूरी से बात करने से, मास्क का प्रयोग करने से, हम पुनः नया जीवन पा सकते हैं। काम पर जा सकते हैं। पढ़ाई कर सकते हैं। खेल सकते हैं। बातें कर सकते हैं। लेकिन अपने को सुरक्षित रखकर।
नन्हीं बच्ची की बातों में दम था। काम पर सबको जाना था। घर का खर्चा सभी को चलाना था। बच्ची को भी पढ़ाई करनी थी। दोस्तों से मिलना था। हंसना था। ठीक आपकी तरह। तो उसने बच्ची ने बहादुरी से इस समस्या का निदान किया। सब ने अपने को, अपने गांव को और अपने देश को सुरक्षित करने की ठान ली। ठीक आप की तरह।
छोटी बच्ची के प्रयासों से सबने अपने को सुरक्षित किया। मास्क पहनकर। नियमित हाथ पैरों को साबुन से साफ रखकर। समूह में एकत्रित ना होकर। बच्ची ने भी अपना हंसी जीवन प्रारंभ किया। अपने अध्यापकों से ऑनलाइन पढ़कर। उनसे बात कर। दोस्तों से फोन पर बात कर। घूमते हुए मास्क का उपयोग कर। हमेशा अपने हाथों को साफ रख कर। एक समय में दो दोस्तों से ही मिलकर। ठीक आपकी तरह। नन्हीं बच्ची जहाँ भी जाती, सभी को समझाती।
और बोलती -
हम सुरक्षित तो देश सुरक्षित।
हम जागरूक तो देश जागरुक।
हम संगठित तो देश संगठित।
कमलेश डालाकोटी
प्रशिक्षित स्नातक संस्कृत
