Saturday, October 10, 2020

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस

 विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस

 स्वरचित कहानी -:

 भोली सी,  प्यारी सी,  एक गुड़िया। नाम- रीना,  मीरा,  हेमा, नेहा।  आप में से कोई भी।  12 - 13 वर्ष की । आपकी ही तरह।  सभी की प्यारी।  हमेशा मुस्कान लिए उछलते-कूदते,  सभी के दु:खों को दूर करने वाली। आपकी ही तरह।  प्यारी सी।  प्रतिदिन विद्यालय जाती।  खूब मन से पढ़ती। खूब खेलती।  खूब गाती।  सभी की दुलारी। 

आज अचानक स्कूल बंद हो गया। खेलना रुक गया।  खेलती- कूदती मुस्कुराती जिंदगी,  अचानक थम-सी गई।  गांव के बड़े बुजुर्ग, अम्मा,  दादा,  नाना - नानी,  सब डरे सहमे से हो गए ना कोई काम पर जाता,  ना कोई किसी से मिलता, ना कोई किसी से प्रेम से बातें करता।  नन्हीं बच्ची तो मानो जेल में बंद हो गई हो। अम्मा,  दादा,  नाना - नानी के मुंह से बस एक बात सुनती - कोरोना।  ना मिलना ना बात करना।  ना कहीं जाना। 

घर गरीब था।  तो रुपयों की तंगी होने लगी।  खाने-पीने में कमी। मेरी चॉकलेट, मेरी मिठाई, सब बन्द।  मेरे दोस्तों से मेरा मिलना तो मानो सदियां बीत गई।  अचानक टीवी में एक दिन उसने देखा लोग भूख से पीड़ित हैं,  खाने को नहीं है। लोग किसी से मिलना नहीं चाहते। मानवता समाप्त हो रही है।  छोटी बच्ची के आंख में आंसू भर आए। 

छोटी बच्ची खूब जानती थी वह बहुत हिम्मती थी। ठीक आपकी तरह। उसे पता था कि कोरोना ऐसे जाने वाला नहीं है। ऐसे में तो खानपान,  घूमना, लिखना सब बंद ही हो जाएगा।  तो उसने ठाना  कि वह सभी लोगों को बताएगी। समझाएगी। और उन्हें जागरूक करके ही दम लेगी। 

तो बच्चों आप जैसी उस नन्हीं सी बच्ची ने क्या किया होगा ?  कैसे अपने अम्मा, दादा, नाना - नानी को जागरूक किया होगा ?  कैसे अपने दोस्तों से मिलना जारी रखा होगा?  कैसे अपनी पढ़ाई जारी रखी होगी ? कैसे उसने अपना जीवन पहले सा बनाया होगा?  कैसे उसने रुपए पैसों की तंगी को दूर करने के उपाय बताए होंगे ?  

एकदम सही बच्चों... आप जैसा सोच रहे हैं उसने वैसा ही किया।  दादा-दादी,  नाना - नानी,  अम्मा को समझाया। बताया कि हमारे साफ हाथों से, लोगों से दूरी से बात करने से,  मास्क का प्रयोग करने से, हम पुनः नया जीवन पा सकते हैं।  काम पर जा सकते हैं। पढ़ाई कर सकते हैं।  खेल सकते हैं। बातें कर सकते हैं। लेकिन अपने को सुरक्षित रखकर। 

नन्हीं बच्ची की बातों में दम था।  काम पर सबको जाना था।  घर का खर्चा सभी को चलाना था। बच्ची को भी पढ़ाई करनी थी।  दोस्तों से मिलना था। हंसना था। ठीक आपकी तरह।  तो उसने बच्ची ने बहादुरी से इस समस्या का निदान किया। सब ने अपने को, अपने गांव को और अपने देश को सुरक्षित करने की ठान ली। ठीक आप की तरह। 

 छोटी बच्ची के प्रयासों से सबने अपने को सुरक्षित किया। मास्क पहनकर। नियमित हाथ पैरों को साबुन से साफ रखकर। समूह में एकत्रित ना होकर।  बच्ची ने भी अपना हंसी जीवन प्रारंभ किया। अपने अध्यापकों से ऑनलाइन पढ़कर। उनसे बात कर।  दोस्तों से फोन पर बात कर। घूमते हुए मास्क का उपयोग कर। हमेशा अपने हाथों को साफ रख कर। एक समय में दो दोस्तों से ही मिलकर। ठीक आपकी तरह।  नन्हीं बच्ची जहाँ भी जाती, सभी को समझाती।

और बोलती -

हम सुरक्षित तो देश सुरक्षित। 

  हम जागरूक तो देश जागरुक। 

हम संगठित तो देश संगठित। 


कमलेश डालाकोटी 

प्रशिक्षित स्नातक संस्कृत 

Tuesday, September 29, 2020

सप्तमः पाठः

भारतजनताऽहम्  

लेखक परिचयः -:

गीतस्य लेखकः महान् आधुनिक कविकुलशिरोमणिः डॉ. रमा कान्त शुल्क महोदयः। महोदयः आधुनिककविषु श्रेष्ठः। डॉ. रमा कान्त शुल्क महोदयः स्वस्य अद्भुत लेखनेन राष्ट्रपति सम्मानेन पद्म श्री सम्मानेन च सम्मानिताः। महोदयस्य कविता पाठः न केवलं भारतीयआकाशवाण्याम् अपितु  दूरदर्शनादि अन्य विविध कविसम्मेलनेषु मॉरीशस-अमेरिका-इटली-यू के इत्यादयः च देशेषु अपि अपि प्रसारितः भवति। 

महोदयस्य रचनाः  -: 

  • भाति मे भारतम्
  • जय भारतभूमे
  • भाँति मौरिशसम्
  • भारतजनताऽहम् 
  • सर्वशुक्ला
  • सर्वशुक्लोत्तरा
  • आशाद्विशती
  • मम जननी
  • राजधानी रचनाः च महोदयस्य प्रमुखाः रचनाः। 
पाठ परिचयः  -:
डॉ रमाकान्त शुक्ल महोदयन रचिते गीते वयं भारतीयाः कीदृशाः स्मः?  अस्माकं काः काः विशेषताः ? कस्मात् कारणात् वयं जगति प्रसिद्धाः ?  इत्यादीनां विषयाणां वर्णनम् अस्ति। गीते भारतीय जनतायाः विविध कौशलानां, विविध रूचीनां  वर्णनं  विद्यते। 


गीत वाचनम् -: अधोलिखित यूट्यूब संकेत माध्यमेन गीतस्य वाचनं कर्तुं शक्यते। 👇

https://youtu.be/J5XioaSfknY


प्रथमः श्लोकः  -: 

अभिमान धना विनयोपेता, शालीना भारतजनताऽहम्। 

कुलिशादपि कठिना, कुसुमादपि सुकुमारा भारतजनताऽहम्।। 

अन्वयः -:

अहं अभिमान धना, विनयोपेता, शालीना भारत जनता अस्मि। अहं कुलीशात् अपि कठिना, कुसुमात् अपि सुकुमारा भारत जनता अस्मि। 

भावार्थः -: 

अहं स्वाभिमान युक्ता, विनम्र युक्ता, शालीन स्वभाव युक्ता भारतस्य जनता अस्मि। अहं वज्रात् अपि कठिना, पुष्पात् अपि सुकुमारा भारतस्य जनता अस्मि। 

हिन्द्यर्थः  -: 

मैं स्वाभिमान से युक्त, विनम्र, अच्छे स्वभाव वाली भारत की जनता हूँ। मैं वज्र से भी कठोर  (क्रोधित होने पर) और पुष्प से भी सुकोमल (दया, स्नेह आदि गुणों के कारण) भारत की जनता हूँ। 


अन्य श्लोकानाम् अध्ययनाय अधोलिखित यूट्यूब संकेतं द्रष्टुं शक्यते। 👇

https://youtu.be/wjCIFz9zLgY


धन्यवादः।। 


विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस

 विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस  स्वरचित कहानी -:  भोली सी,  प्यारी सी,  एक गुड़िया। नाम- रीना,  मीरा,  हेमा, नेहा।  आप में से कोई भी।  12 - 13...